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योग और स्वास्थ्य
 

योग भारत की स्वास्थय परंपरा का अमूल्य हिस्सा है|

योग भारत की स्वास्थय परंपरा का अमूल्य हिस्सा है| योग शब्द संस्क्रुत भाषा के युज शब्द पर आधारित है जिस्का अर्थ है EसंगठनF| इस संगठन से हम यह निषकर्ष निकाल सकतें है; अपनी सभी इद्रिंयों को किसी एक कार्य पर केंद्रित करना| योगाभ्यास शरीर, श्वास तथा मन के बीच का संगठन है|

पतांजलि सत्र में योग का विवरण कुछ इस प्रकार से दिया गया है:- Eयोगः चित्रः वित्री निरोधः जिस्का अर्थ है योग में वह शक्ति है जिस्के द्वारा हम संपूर्ण इद्रिंयों को एक वस्तु पर बिना किसी शेक्याम के केंद्रित कर सकतें है|

योग को सभी मुद्रायें प्रकृति पर आधारित हैं| उदाहरण के तौर पर ट्ट मयूरासन की शारीरिक मुद्रा मयूर (मोर) के समान है और वह मयूर पर आधारित है| इस आसन को करने से हाथ, निचली पीठ, जयाधा, पेट की माँसपेशियों को बल मिल्ता है तथा पाचन क्रिया सुधर जाती है| उसी प्रकार से भगीरथासन एक पेड पर आधारित है| इस आसन को करने से पैरों को बल मिल्ता है तथा खडें होने की मुद्रा में स्वयं शक्ति का कुशल आभास होता है| भुजंगासन कोब्रा सर्प पर आधारित है और इस आसन का अभ्यास करने से निचली पीठ को बल मिल्ता है तथा फेफडों के हवा द्धिद्र खुला जातें है|
उसी प्रकार से भगीरथासन एक पेड पर आधारित है| इस आसन को करने से पैरों को बल मिल्ता है तथा खडें होने की मुद्रा में स्वयं शक्ति का कुशल आभास होता है| भुजंगासन कोब्रा सर्प पर आधारित है और इस आसन का अभ्यास करने से निचली पीठ को बल मिल्ता है तथा फेफडों के हवा द्धिद्र खुला जातें है|

राज योग क्या है?

'राज योग' अभ्यास को श्व्सन अभ्यास, शारीरिक मुद्रायें तथा ध्यान अभ्यास के साथ जोडा जा सकता है| राज योगा को अष्टांग योग के नाम से भी जाना जाता है| यह योगा में राजा कहलाया जाता है इस्में आठ भाग होतें है-

आतंरिक (यम) तथा बाहरी (नियम), शारीरिक मुद्रायें (आसन), श्वास नियम (प्राणायम) वैराग्य अभ्यास (प्रत्याहरः), लगन (धरन), ध्यान तथा समाधि|
 

लेख : श्वास क्रियायेंं